Monday, October 31, 2022

लेखपाल भर्ती के लिए PET में कितने स्कोर की पड़ेगी जरूरत

 

लेखपाल भर्ती के लिए PET में कितने स्कोर की पड़ेगी जरूरत

PET 2022 के मार्क्स के आधार पर अभ्यर्थियों को लेखपाल समेत कई महत्वपूर्ण भर्तियों की मुख्य परीक्षा में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। यह उम्मीद जताई जा रही है कि PET 2022 में 68 से अधिक मार्क्स लाने वाले अभ्यर्थियों को UPSSSC द्वारा निकाले जाने वाली अगली लेखपाल भर्ती की मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिल सकता है। गौरतलब है कि 2022 की शुरुआत में लेखपाल के 8085 पदों पर निकली भर्ती में हिस्सा लेने के लिए 13,90,305 आवेदन आए थे। इनमें से UPSSSC ने PET 2021 के स्कोर के आधार पर मुख्य परीक्षा के लिए 2,47,667 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया था। आयोग ने PET 2021 में 62.96 मार्क्स लाने वाले जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों तथा 61.80 मार्क्स लाने वाले एससी और 44.71 मार्क्स लाने वाले एसटी श्रेणी के अभ्यर्थियों को लेखपाल भर्ती की मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया था।

राज्य में फिर से कब होगी लेखपाल की भर्ती 

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में इस वक्त लेखपाल के तकरीबन 4500 पद खाली हैं और इन पदों पर आयोग जल्द ही भर्ती कर सकती है। यह उम्मीद जताई जा रही है कि PET 2022 का स्कोरकार्ड जारी किए जाने के बाद लेखपाल के इन पदों पर भी भर्ती की जा सकती है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट (AHC) उत्तर प्रदेश सिविल कोर्ट ने ग्रुप 'C' और 'D' के विभिन्न 3932 पदों भर्ती निकली है।

 Allahabad High Court Group C and D Recruitment 2022: इलाहाबाद हाई कोर्ट (AHC) उत्तर प्रदेश सिविल कोर्ट ने ग्रुप 'C' और 'D' के विभिन्न 3932 पदों भर्ती निकली है। जो उम्मीदवार AHC विभिन्न पोस्ट 2022 भर्ती में रुचि रखते हैं और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करते हैं, वे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया 30 अक्टूबर को शुरू हो चुकी है और फॉर्म भरने का आखिरी दिन 13 नवंबर 2022 है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है, आवेदन करने से पहले नीचे दी गई भर्ती से जुड़ी डिटेल्स पढ़ लें, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू करें।

Tuesday, September 27, 2022

क्षेत्रमिति: फार्मूला

 

क्षेत्रमिति: फार्मूला,

द्विविमीय आकृतियाँ (Two Dimensional Figures)

आयत (Rectangle)

क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई

परिमिति = 2 (लम्बाई + चौड़ाई)

विकर्ण = 

वर्ग (Square)

क्षेत्रफल = (भुजा) ²

परिमिति = 4 × भुजा

विकर्ण =  × भुजा

त्रिभुज (Triangle)

विषमबाहु त्रिभुजः यदि a, b तथा c क्रमशः पहली, दूसरी और तीसरी भुजा की लम्बाईयाँ हो तब

(s = अर्ध-परिमिति) = 

और, क्षेत्रफल = 

समकोण त्रिभुज

यदि त्रिभुज समकोण हो, तब

क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई

समबाहु त्रिभुज

यदि त्रिभुज समबाहु हो, तब

क्षेत्रफल = 

a भुजा वाली समबाहु त्रिभुज के अन्तः वृत्त की त्रिज्या = 

a भुजा वाली समबाहु त्रिभुज के परिवृत्त की त्रिज्या = 

वृत्त (Circle)

क्षेत्रफल = π × (त्रिज्या)²

परिधि = 2π × त्रिज्या

त्रिज्या = 

अर्द्ध-वृत्त (Semicircle)

अर्द्ध-वृत्त का क्षेत्रफल = 1/2 × π R²

अर्द्ध-वृत्त की परिमिति = (π R + 2R)

चाप की लम्बाई = 

वृत्तखण्ड AOB का क्षेत्रफल

= 1/2 × (चाप AB) × R = 

कमरे की चार दीवारों का:

क्षेत्रफल = 2 × ऊंचाई (लम्बाई + चौड़ाई)

ऊंचाई = 

चतुर्भुज (Quadrilateral)

समांतर चतुर्भुज (Parallelogram)

क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई

समचतुर्भुज (Rhombus)

क्षेत्रफल = 1/2 × विकर्णों का गुणनफल

समलम्ब चतुर्भुज (Trapezium)

क्षेत्रफल = 1/2 × (समान्तर भुजाओं का योग) × उनके बीच की दूरी

विषमबाहु चतुर्भुज (Trapezoid)

क्षेत्रफल = ½ (DP + BQ) × AC

त्रिविमीय आकृतियाँ (Three dimensional Figures)

घनाभ (Cuboid)

यदि घनाभ की लम्बाई, चौड़ाई तथा ऊँचाई क्रमशः L, B और H हो तब

आयतन = L × B × H

सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल = 2 (L × B + B × H + H + L)

विकर्ण = 

घन (Cube)

यदि घन की प्रत्येक भुजा a हो, तब

आयतन = a × a × a = a³

सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल = 2(a × a + a × a + a × a) = 6a²

घन का विकर्ण = 

बेलन (Cylinder)

यदि बेलन की त्रिज्या r तथा ऊँचाई या लम्बाई h हो, तब

आयतन = πr²h

क्षेत्रफल = 2πrh

सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल = (2πrh + 2πr²)

शंकु (Cone)

यदि शंकु के आधार की त्रिज्या, ऊँचाई तथा इसकी तिर्यक-ऊँचाई क्रमशः r, h तथा ℓ हो, तब:

आयतन = 

वक्र-पृष्ठ का क्षेत्रफल = πrℓ

सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल = πrℓ + πr²

तिर्यक ऊँचाई = ℓ = 

गोला (Sphere)

यदि गोले की त्रिज्या r हो, तब

आयतन = 

वक्र-पृष्ठ क्षेत्रफल = 4πr²

अर्द्ध-गोला (Semisphere)

आयतन = 

वक्र-पृष्ठ क्षेत्रफल = 2πr²

सम्पूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल = 2πr² + πr² = 3πr²

 

बाल विकास (Child Developmet)

 बाल विकास (Child Developmet) - बाल विकास का अध्ययन करने के लिए 'विकासात्मक मनोविज्ञान' की एक अलग शाखा बनायी गयी, जो बालकों के व्यवहारों का अध्ययन गर्भावस्था से होकर मृत्युपर्यत करती है। परंतु वर्तमान समय में इसे 'बाल विकास' (Child Development) में परिवर्तित कर दिया गया।

हरलॉक (Hurlock) ने इस संबंध में कहा है कि ‘‘बाल मनोविज्ञान का नाम बाल विकास इसलिए रखा गया क्योकि विकास के अंतर्गत अब बालक के विकास के समस्त पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, किसी एक पक्ष पर नहीं।''

विभिन्न विद्वानों ने बाल विकास को निम्न प्रकार से परिभाषित किया है- क्रो और क्रो (Crow & Crow, 1958) के अनुसार, “बाल मनोविज्ञान वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो व्यक्ति के विकास का अध्ययन गर्भकाल के प्रारंभ से किशोरावस्था की प्रारंभिक अवस्था तक करता है।''

जेम्स ड्रेवर (James Drever; 1968) के अनुसार, “बाल मनोविज्ञान मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसमें जन्म से परिपक्वावस्था तक विकसित हो रहे मानव का अध्ययन किया जाता है।

आइजनेक (Eysenck, 1972) के अनुसार, “बाल मनोविज्ञान का संबंध बालक में मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के विकास से है। गर्भकालीन अवस्था, जन्म, शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था और परिपक्वावस्था तक के बालक की मनोवैज्ञानिक विकास प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।''

हरलॉक (Hurlock, 1978) के अनुसार, ‘‘बाल विकास मनोविज्ञान की वह शाखा है जो गर्भाधान से लेकर मृत्युपर्यंत तक मनुष्य के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में होनेवाले परिवर्तनों का अध्ययन करता है।''

उपयुक्त परिभाषाओं से यह स्पष्ट होता है कि बाल विकास बाल मनोविज्ञान की ही एक शाखा है जो बालकों के विकास, व्यवहार, विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न तथ्यों का अध्ययन करता है।बाल मनोविज्ञान तथा बाल विकास में अंतर यह है कि बाल मनोविज्ञान बालक की क्षमताओं का अध्ययन करता है जबकि बाल विकास क्षमताओं के विकास की दशा का अध्ययन करता है।

बाल मनोविज्ञान दो शब्दों से मिलकर बना है। बाल + मनोविज्ञान। 'बाल' का अर्थ है बालक अर्थात वह प्राणी जो प्रौढ़ की श्रेणी में नहीं आया, हो उसे बालक की श्रेणी में रखा जाता है। मनोविज्ञान से अभिप्राय मन के विज्ञान से है। अतः बाल मनोविज्ञान से तात्पर्य विज्ञान की उस शाखा से है जो बालकों के मन (व्यवहारो) का अध्ययन गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक करता है ।

बाल विकास की प्रकृति (Nature of Child Development) -

बाल विकास की प्रकृति निम्नलिखित है-                     

1. मनोविज्ञान की एक विशिष्ट शाखा के रूप में बाल विकास (Child Development as a Special Branch of Psychology) - मनोविज्ञान में विभिन्न प्रकार के प्राणियों के व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। व्यवहार में कई प्रकार, कई पक्ष (Aspects) तथा कई आयाम (Dimensions) होते हैं।

बाल विकास मनोविज्ञान की एक महत्वपूर्ण, उपयोगी तथा समाज और राष्ट्र के लिए कल्याणकारी शाखा है। मनोविज्ञान की शाखा में केवल मानव-व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। गर्भकालीन अवस्था से लेकर युवावस्था तक के विकासशील मानव के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।

इस अवस्था में मानव व्यवहार के विकास तथा विभिन्न आयु-स्तरों पर भी विशिष्ट व्यवहारों का अध्ययन किया जाता है। यहाँ विकास का अर्थ है—मानव की जैविक संरचना (Biological Structure) तथा मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं (Psychological Processes) में होने वाले क्रमिक परिवर्तन।


2. मनोविज्ञान में विशिष्ट उपागम के रूप में बाल विकास विषय (Child Development as a Special Approach in Psychology) - मानव व्यवहारों के अध्ययन के लिए बाल विकास में कई विशिष्ट उपागम या विचार-पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। ये उपागम निम्नलिखित हैं-

(a) प्रयोगात्मक उपागम (Experimental Approach) - इस उपागम के द्वारा बाल विकास की विभिन्न समस्याओं के अध्ययन में कार्य-कारण संबंध (Cause & Effect Relationship) को जानने का प्रयास किया जाता है।

इस उपागम के द्वारा एक विशिष्ट व्यवहार किस परिस्थिति में उत्पन्न होता है या एक परिस्थिति-विशेष में व्यक्ति किस प्रकार के व्यवहार की अभिव्यक्ति करेगा. यह अध्ययन किया जा सकता है।


(b) दैहिक उपागम (Physiological Approach) - नाड़ी संस्थान (Nervous System) प्राणी के शरीर की संपूर्ण क्रियाओं को नियंत्रित करता है। ये क्रियाएँ शारीरिक भी हो सकती हैं और मनोवैज्ञानिक भी।

शारीरिक वृद्धि, विकास और स्वास्थ्य मुख्यतः हार्मोन्स और ग्रंथियों की क्रियाशीलता से संबंधित होता है। बाल विकास को दैहिकशास्त्र (Physiology) के ज्ञान के द्वारा भी समझा जा सकता है, क्योकि जैविक आत्म (Biological Self) तथा मानसिक आत्म (Psychic Self) एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से संबंधित होते हैं।

गर्भकालीन शिशु और शिशुओं के व्यवहार से संबंधित समस्याओं का समाधान मुख्य रूप से इस उपागम द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।


(c) विकासात्मक उपागम (Developmental Approach) - बाल विकास की समस्याओं के अध्ययन के लिए विकासात्मक उपागम भी अपनाया जाता है। इस उपागम को अपनाने का मुख्य कारण यह है कि जब बालक एक नयी विकास अवस्था में पहुँचता है तब उसमें कुछ नई रुचियों, कुछ नई अभिवृत्तियों, कुछ नये लक्षणों, कुछ ये शील-गुणों का एक विशिष्ट समूह (Cluster) निर्मित होता है। इस प्रकार के विशिष्ट यह कई अवस्थाओं में देखे जा सकते हैं। विकासात्मक उपागम (Approach) के द्वारा विकास की मात्रा, गति और विकास की विशिष्टताओं आदि की जानकारी अलग-अलग तथा सम्पूर्ण रूप में होती है।

(d) व्यक्तित्व संबंधी उपागम (Personality Approach) - किसी बालक का व्यवहार उस बालक के किसी-न-किसी पहलू को अभिव्यक्त करता है। जन्म से ही व्यक्तित्व का निर्माण प्रारंभ हो जाता है। भिन्न भिन्न व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों का व्यवहार भी भिन्न-भिन्न होता है।

व्यक्तित्व के शीलगुणों (Traits) की स्थिरता व्यक्तियों के समायोजन, अभिवृत्तियों और आदतों आदि के निर्माण से संबंधित होता है।

अतः व्यक्तित्व के शील-गुणों के आधार पर व्यक्ति के समायोजन, अभिवृतियों और आदतों आदि के संबंध में भविष्यवाणी की जा सकती है।


(e) एक विशिष्ट अध्ययन प्रणाली के रूप में बाल विकास (Child Development as a Special Study Approach) - बाल विकास बाल मनोविज्ञान का ही एक विकसित रूप है, जिसकी अपनी विशिष्ट अध्ययन-प्रणाली है।

यूपी सुपर टीईटी 2022 अधिसूचना, परीक्षा तिथि, आवेदन ऑनलाइन

 उत्तर प्रदेश सुपर टीईटी 2022 परीक्षा तिथि और अनुसूची इस पृष्ठ पर अपडेट की गई है: उत्तर प्रदेश सरकार सुपर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) आयोजित करने जा रही है, जिसके तहत 17000 रिक्तियों को अधिसूचित किया गया है। यूपी सुपर टीईटी 2022 अधिसूचना की प्रतीक्षा कर रहे सभी उम्मीदवारों को अब खुश होना चाहिए क्योंकि पंजीकरण खुलने वाले हैं। आप इस भर्ती परीक्षा के लिए पंजीकरण करने की अंतिम तिथि से पहले यूपी सुपर टीईटी 2022 आवेदन पत्र भर सकते हैं। यह भर्ती उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही है।

परीक्षा उत्तीर्ण करने पर आप प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए पात्र होंगे और इस रिक्ति के तहत भर्ती होने का मौका भी मिलेगा। इस पोस्ट में हमने यूपी सुपर टीईटी 2022 पात्रता और ऑनलाइन यूपी सुपर टीईटी 2022 आवेदन करने के चरणों पर चर्चा की है ।



ब्रह्म समाज

 ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय थे। राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज की स्थापना कोलकाता में 20 अगस्त 1828 मे की गई। ब्रह्म समाज भारत का एक सामाजिक धार्मिक आंदोलन था जिसने बंगाल सहित पूरे भारत के पुनर्जागरण युग को प्रभावित किया।


ब्रह्म समाज का एक प्रमुख उद्देश्य विभिन्न प्रकार के धार्मिक आस्थाओं में बटी हुई जनता को एकत्रित करना और समाज में फैली बुराइयों को दूर करना था। ब्रह्म समाज के प्रमुख सिद्धांत एक ही ईश्वर की उपासना, मानव के प्रति भाईचारे की भावना तथा सभी धर्मों के प्रति सभी लोगों में श्रद्धा उत्पन्न करना था।

ब्रह्म समाज ने वेद और उपनिषद को आधार मानकर बताया कि ईश्वर एक है ,सभी धर्मों में सत्यता है तथा सामाजिक बुराइयों का धर्म से कोई संबंध नहीं है.

Sunday, September 25, 2022

भारतीय संविधान के भाग

 🟦 भारतीय संविधान के भाग ✍


♦️भारतीय संविधान के 22 भाग है


◾️भाग 1 - संघ और उनका राज्यक्षेत्र


◾️भाग 2 - नागरिकता


◾️भाग 3 -  मूल अधिकार


◾️भाग 4 - राज्य की नीति के निर्देशक तत्व

🔺4 (क) मूल कर्तव्य


◾️भाग 5 - संघ


◾️भाग 6 - राज्य


◾️भाग 7 - निकाल दिया गया निरस्त कर दिया गया


◾️भाग 8 - संघ राज्य क्षेत्र


◾️भाग 9 - पंचायत


🔺9 (क) नगर पालिकाए

🔺9 (ख) सहकारी समितियां


◾️भाग - 10 - अनुसूचित जाति, जनजातीय क्षेत्र 


◾️भाग 11 - संघ और राज्यों के बीच संबंध


◾️भाग - 12 - वित्त, संपत्ती, संविदाए और वाद


◾️भाग - 13 - भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम


◾️भाग - 14 - संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं

🔺14 (क) अधिकरण


◾️भाग 15 - निर्वाचन


◾️भाग 16 - कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध


◾️भाग 17 - राज्य भाषा


◾️भाग 18 - आपात उपबंध


◾️भाग 19 - प्रकीर्ण


◾️भाग 20 - संविधान का संशोधन


◾️भाग 21 - अस्थाई, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध


◾️भाग 22 - संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी में प्राधिकृत पाठ और निरसन

GK

  51- fdl oSfnd xzaFk esa ^o.kZ* ’kCn dk loZizFke ukeksYys[k feyrk gS\ ¼ a ½ _Xosn      ¼ b ½ vFkZoZosn  ¼ c ½ lkeosn ¼ d ½ ;tqosZn 52- ...